रिश्तों को सम्भाल कर रखना ;
रिश्ते टूट ना जाएँ।
जैसे दिए की कोई टिमटिमाती बाती हो ;
जैसे नाज़ुक कलियों की पंखुड़िआ हो;
जैसे नाज़ुक कलाइयों की चुड़िआं हो;
जैसे जुलाहे के कच्चे धागे हो ;
ये तो शायद जुड़ भी जाएँ ;
पर रिश्ते टूटे तो जुड़ नहीं पाते;
हाँ, अगर जुड़ भी जाएँ ;
तो गांठे पड़ जाती हैं।
रिश्ते टूट ना जाएँ।
जैसे दिए की कोई टिमटिमाती बाती हो ;
जैसे नाज़ुक कलियों की पंखुड़िआ हो;
जैसे नाज़ुक कलाइयों की चुड़िआं हो;
जैसे जुलाहे के कच्चे धागे हो ;
ये तो शायद जुड़ भी जाएँ ;
पर रिश्ते टूटे तो जुड़ नहीं पाते;
हाँ, अगर जुड़ भी जाएँ ;
तो गांठे पड़ जाती हैं।
Chitrangada Sharan, 28.02.2014
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Image source: Chitrangada Sharan Images


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