Wednesday, June 8, 2016

Fursat me!

फुरसत  में ----

कभी  ऐसा भी  वक़्त  था ,
फुर्सत  के लिए  तरसते  थे,

आज  ये  आलम  है,
फुर्सत  न  हो, इसके  लिए ,
तरसते हैं  । 

जीवन  की शाम  में, 
क्यों होता है ऐसा ,
आने  वाले  नहीं , 
गुज़रे  हुए  ज़माने  की,
बातें  ज्यादा  याद  आती  है।  
Chitrangada Sharan
8th June, 2016
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Tuesday, March 8, 2016

Tuesday, January 26, 2016

HAPPY REPUBLIC DAY 2016!
Chitrangada Sharan 26th Jan. 2016
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Wednesday, May 20, 2015

MUSHKILEN !


मुश्किलें कुछ इस कदर बढी ---
कि मुस्कुराना भूल गए --------
रोज़ यूँ ही बैठे रहतें हैं , 
नसीब के कदमों के इंतज़ार में---
कहीं आना जाना भूल गए----

क्या दिन थे वो , 
जब हँसते- मुस्कुराते कटते थे दिन-रात ,
कब सुबह हुई, कब शाम ढली ,
खबर ही कहाँ होती थी ,
 अब ये आलम है कि ,
घडी की सुइयों पे टकटकी लगाये बैठे हैं.  

चित्रांगदा शरण 
२० मई , २०१५ 

Chitrangada Sharan 
20th May, 2015
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