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Friday, February 28, 2014

RISHTEY!

रिश्तों  को  सम्भाल  कर रखना ;
रिश्ते  टूट  ना  जाएँ। 

जैसे  दिए  की  कोई टिमटिमाती बाती  हो ;
जैसे नाज़ुक  कलियों की पंखुड़िआ हो;

जैसे  नाज़ुक  कलाइयों  की  चुड़िआं  हो;
जैसे जुलाहे  के  कच्चे  धागे  हो ;

ये  तो शायद जुड़  भी  जाएँ ;
पर  रिश्ते टूटे  तो जुड़  नहीं  पाते;

हाँ, अगर  जुड़ भी जाएँ ;
तो  गांठे  पड़  जाती  हैं। 


Chitrangada Sharan, 28.02.2014
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Image source: Chitrangada Sharan Images